ताना बाना | 04.07.2009
यूरोपीय संघ के 27 देशों में ईरानी राजदूत तलब
यूरोपीय संघ के मौजूदा अध्यक्ष स्वीडन के एक अधिकारी ने बताया, "पूरे यूरोपीय संघ में ईरानी राजदूतों तलब किया रहा है. साथ ही तेहरान में ब्रिटिश दूतावास के कर्मचारियों को लेकर स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है." यूरोपीय संघ के देशों ने तेहरान में ब्रिटिश दूतावास के स्थानीय कर्माचारियों की गिरफ़्तारी के विरोध में ब्रिटेन के साथ एकजुटता दिखाने के लिए यह क़दम उठाया है.
ब्रसेल्स में शुक्रवार को हुई यूरोपीय संघ के देशों की बैठक के दौरान ईरान के ख़िलाफ़ कुछ शुरुआती क़दमों पर सहमति बनी जिनके तहत आगे चलकर वीज़ा प्रतिबंध लगाने के साथ साथ ईरान से यूरोपीय संघ के राजदूतों को भी वापस बुलाया जा सकता है. हालांकि एक यूरोपीय अधिकारी ने कहा कि यह सब इस बात पर निर्भर होगा कि ईरान में स्थिति क्या मोड़ लेती है. लेकिन फ़्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सार्कोजी के साथ मुलाक़ात में स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक राइनफेल्ट ने कहा, "यह स्पष्ट है कि हमें एकजुटता दिखानी चाहिए कि हम एक हैं."
हालांकि यूरोपीय संघ के देश ईरान को इस वक़्त पूरी तरह अलग थलग भी करना नहीं चाहते. ख़ासकर ऐसे समय में जब उसका विवादास्पद परमाणु कार्यक्रम भी पश्चिमी जगत के लिए चिंता का कारण बना हुआ है. जर्मनी के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अगर ईरान की स्थिति में बदलाव नहीं आता है, तो इसका असर यूरोपीय संघ और ईरान के संबंधों पर तुरंत पड़ेगा. अगले हफ़्ते इटली में जी8 देशों के प्रमुखों की बैठक में भी ईरान एक अहम मुद्दा रहेगा.
Bildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift: सारकोज़ी के साथ राइनफेल्ट
पिछले महीने ईरानी सरकार ने ब्रिटिश दूतावास में काम कर रहे नौ ईरानी कर्मचारियों को गिरफ़्तार किया था. शुक्रवार को ईरान की गार्डियन काउंसिल के प्रमुख अयातुल्ला जन्नती ने कहा कि इन लोगों पर मुकदमा भी चल सकता है. आरोप है कि इन लोगों ने चुनाव के बाद हुए प्रदर्शनों में लोगों को उकसाया था. ब्रिटेन इस बात से साफ़ इनकार करता है. अब ब्रिटिश दूतावास के कर्मचारियों पर मुक़दमा चलाने की बात पर ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड ने कहा है कि वह इस बारे में ईरान से तुरंत स्पष्टीकरण चाहते हैं. वह ईरानी विदेश मंत्री मनुशेर मोत्ताकी से बात करेंगे. यह अभी साफ नहीं है कि कितने लोगों पर मुकदमा चलेगा. इस बीच ब्रिटेन और ईरान ने एक दूसरे के राजदूतों को अपने यहां से निकाल दिया है.
ईरान में पिछले महीने राष्ट्रपति चुनाव हुए थे जिसमें राष्ट्रपति अहमदीनेजाद भारी मतों से विजयी हुए. लेकिन पराजित उम्मीदवार मीर हुसैन मुसावी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है और दोबारा चुनाव की मांग की है. इस सिलसिले में मुसावी और उनके समर्थकों ने देश में काफ़ी प्रदर्शन किए जिनमें से कुछ हिंसक भी साबित हुए हैं. गार्डियन काउंसिल के प्रमुख अयातुल्ला जन्नती का मानना है कि पश्चिमी देश ईरान के ख़िलाफ एक "मखमली क्रांति" चला रहे हैं जिससे वह ईरान की इस्लामी नींव को हिलाना चाहते हैं. अयातुल्लाह जन्नती ईरान की सर्वोच्च संवैधानिक परिषद गार्डिन काउंसिल के प्रमुख है. इसी काउंसिल की देखरेख में चुनाव होते हैं. अब तक इस परिषद ने चुनाव में धांधली के सारे आरोपों को खारिज किया है.
रिपोर्टः एजेंसियां/एम गोपालकृष्णन
संपादनः ए कुमार





















