रंग तरंग | 22.03.2010
बॉलिवुड की धुन पर थिरकता पाकिस्तान
सलेहा फ़िरदौस, दो बड़े बच्चों की मां हैं वो पिछले एक साल से डांस स्टूडियो में बॉलिवुड के गानों पर थिरक रहीं हैं. उन्हें ऐसा करना बहुत अच्छा लगता है. 22 साल की महीन जाफ़री अब तक अपने घर की चार दीवारी में ही डांस करती थीं लेकिन जैसे ही उन्होंने बॉलिवुड डांस स्टूडियो के बारे में जाना, वो अपने आप को रोक न पाई.
डांस स्टूडियो में जाकर डांस सीखना एक बहुत ही आम बात है.लेकिन पाकिस्तान जैसे रुढ़िवादी देश में महिलाओं का डांस सीखना मुश्किल है और बिलकुल आम नहीं. पाकिस्तान में महिलाओं का बॉलिवुड डांस सीखना कई लोगों को चौंका देता है.
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अपने लिए
39 साल की फ़िरदौस हफ़्ते में दो बार जोशिन्दर शैगर्स की डांस क्लास में जाती हैं. वो कहती हैं "ऐसा लगता जैसे मैं अपने घर से दूर किसी और ही दुनिया में हूं. इतने साल घर, बच्चे और पति को संभाला है कि अब कम से कम हफ़्ते में दो घण्टे तो अपने लिए निकाल ही सकती हूं ".
लेकिन फ़िरदौस की डांस क्लास के बारे में उनके ससुराल वाले नहीं जानते. फ़िरदोस कहती हैं "वो नहीं समझेंगे ". फ़िरदौस के ससुराल वालों को लगता है कि वो कसरत करने जाती हैं .
अर्थशास्त्र की छात्रा जाफ़री, बाडी बीट रिक्रियेशनल सेन्टर का हिस्सा हैं और कहती हैं "मैं बुरी नर्तकी कभी भी नहीं थी, लेकिन थोड़ी रुढ़िवादी और कमज़ोर ज़रूर थी." फिर उनके टीचर हज़न रिज़्वी ने उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत दी.
बढ़ता चस्का
चाहे 16 के हों या 60 के कसरत, योग और एरोबिक्स के आदी लोग "बॉलिवुड डांसक्लास से रहें फ़िट" जैसे वाक्यों से रिज़वी और शैगर की क्लासेस की ओर खिंचते चले जा रहे हैं. इतना ही नहीं, पर्दा निकालने के साथ-साथ ये सभी महिलाएं संकोच और आशंकाओं को पीछे छोड़ नृत्य की दुनिया में कदम रख रही हैं.
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बॉलिवुड डांस से एक पाकिस्तानी महिला को सब कुछ मिलता है. डॉक्टर तर्रन्नुम अहमद कहती हैं की ये क्लासेस महिलाओं में "फ़ील गुड फै़क्टर" लाती हैं. "इस एक घण्टे में ये महिलाएं अपनी सारी इच्छाएं पूरी कर लेती हैं, इनका आत्मविश्वास बढ़ता है और ये अच्छा महसूस करती हैं " .
5 साल की उम्र से ही भरतनाटयम सीख रहे शैगर कहते हैं कि डांस, एक्सप्रेस करने का एक ज़रिया माना जाता है. रिज़्वी का मानना है कि " डांस के ज़रिए हम नए लोगों से मिलते हैं, मेलजोल बढ़ाते हैं और काफ़ी दिलचस्प भी है."
बहुत से कारण
बॉलिवुड डांस की तरफ़ बढ़ने के लोगों के अलग-अलग कारण हैं . 40 से 50 साल की महिलाएं अपने बच्चों की शादी या किसी विशेष अवसर के लिए डांस सीखती हैं. 42 साल की फ़हमिदा मस्कतिया का कहना है कि" मेरे पास कई महिलाएं आती हैं जिनको नाचना नहीं आता और वो शादियों के लिए डांस सीखने आती हैं ".
फ़हमिदा अपने घर पर डांस क्लासेस देती हैं. वो हमेशा से डांस सिखाना चाहती थीं लेकिन घर पर बात करने से डरती थीं. लेकिन जब उनके पति ने उनका साथ दिया तो उनकी हिम्मत और बढ़ गई. अब उनके साथ जुड़ने वाली महिलाओं की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है.
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ख़ुशी के लिए
कई महिलाएं खुद को खुश रख़ने के लिए भी डांसिंग से जुड़ती हैं. रिज़वी कहते हैं कि "मेरी ज़िन्दगी का वो सबसे बेहतरीन दिन था, जब उनकी एक छात्रा के पति ने उनसे आकर कहा कि मेरी क्लासेस की वजह से उनकी पत्नी में काफ़ी सकारात्मक बदलाव आए हैं. वो पहले से ज़्यादा ख़ुश और मिलनसार हो गई हैं." रिज़्वी मानते हैं कि अगर डांसिंग से लोगों की ज़िन्दगी ऐसे ही बदलती रही तो वो इसे हमेशा करना चाहेंगे .
डांस इंस्ट्रक्टर शैगर कहती हैं, " क्लास के दौरान हम सबके चेहरों पर एक अच्छी सी मुस्कान रहती है. हम सब बहुत अच्छा और पाज़िटिव महसूस करते हैं." हाल ही में हुए हमलों की और संकेत करते हुए शैगर कहती हैं,"इस तनाव भरे माहौल में पाज़िटिविटी की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है."
बेकार बॉलिवुड
लेकिन हर कोई बॉलिवुड डांस की बढ़ती लोकप्रियता से खुश नहीं है. शीमा करमानी, एक प्रसिद्ध क्लासिकल डांसर, बॉलिवुड डांस को बेमतलब, ज्ञान और रचनात्मकता विहीन मानती हैं. वो कहती हैं कि "समाज के बदलते तौर-तरीके उन्हें निराश करते हैं." गैर सरकारी संगठन, तेहरीक-ए-निसवान की संस्थापक करमानी का ये भी मानना है कि जिस कला के पास दिमाग के लिए कोई आहार न हो, सोच न हो, राजनीति न हो, तो वो कला नहीं.
रिपोर्टः एजेंसियां/श्रेया कथूरिया
संपादनः आभा मोंढे














